नशे के सौदागरों की अब खैर नहीं, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने खोला मोर्चा।
- Bureau ApnaSamachar
- May 27
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'अपना समाचार' की विशेष पड़ताल: नशे के खिलाफ भोपाल प्रशासन का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार; सूचना देने वालों का नाम रहेगा गुप्त, पुलिस केस का भी कोई झंझट नहीं!
भोपाल। राजधानी भोपाल की रगों में घोले जा रहे नशे के धीमे ज़हर को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कमर कस ली है। जिले के नौजवानों के भविष्य को सुरक्षित करने और समाज को इस कुरीति से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और सख्त मुहिम की शुरुआत की है। कलेक्टर ने सीधे भोपाल की जनता से संवाद करते हुए एक बड़ा अपील संदेश जारी किया है, जिसने नशे के अवैध कारोबारियों की रातों की नींद उड़ा दी है।
"नशा एक ऐसा ज़हर, जिसने समाज को चारों तरफ से घेरा"
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बेहद बेबाकी से इस बात को स्वीकार किया कि ड्रग्स (नशा) की लत हमारे समाज को भीतर ही भीतर खोखला कर रही है। उन्होंने कहा, "आप सबने भी यह महसूस किया होगा कि हमारे आसपास कई युवा, जो शायद हमारे परिवार, दोस्तों या सहपाठियों का हिस्सा हो सकते हैं, इस दलदल में फंस चुके हैं। इस सामाजिक कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अब हम सबको एकजुट होना ही पड़ेगा।"
'मानस एप' और टोल-फ्री नंबर '1933' बनेगा सबसे बड़ा हथियार
प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि अब केवल बातें नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर कड़ा एक्शन होगा। भारत सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा संचालित हेल्पलाइन की मदद से भोपाल को 'ड्रग्स फ्री' बनाने का खाका तैयार कर लिया गया है।
अगर आपके आसपास कोई भी व्यक्ति:
ड्रग्स या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करता है।
गुपचुप तरीके से नशे की पुड़िया या ड्रग्स बेचने की कोशिश करता है।
या फिर आपके संज्ञान में नशे के कारोबार से जुड़ी कोई भी छोटी-बड़ी जानकारी आती है...
तो आप तुरंत टोल-फ्री नंबर 1933 पर कॉल कर सकते हैं या 'मानस एप' (MANAS App) के ज़रिए प्रशासन को सूचित कर सकते हैं।
नाम रहेगा 'टॉप सीक्रेट', पुलिस केस से भी पूरी आज़ादी!
आमतौर पर लोग पुलिसिया पचड़ों और अपनी सुरक्षा के डर से नशे के सौदागरों के खिलाफ मुंह खोलने से कतराते हैं। इसी डर को खत्म करने के लिए कलेक्टर ने भोपाल वासियों को सबसे बड़ी गारंटी दी है:
पूर्ण गोपनीयता: सूचना देने वाले का नाम, पता या कोई भी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। इसे किसी भी स्तर पर डिस्क्लोज नहीं किया जाएगा।
कोई कानूनी झंझट नहीं: जानकारी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ किसी भी तरह का पुलिस केस या कानूनी कार्रवाई का कोई खतरा नहीं होगा। आपका काम केवल प्रशासन तक सही सूचना पहुँचाना है।
अपना समाचार की टिप्पणी: अब जनता की बारी!
प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि भोपाल को 'ड्रग्स फ्री' जिला बनाने में जनता की एक छोटी सी सही जानकारी बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ ला सकती है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का यह 'धुरंधर' और सुरक्षात्मक रुख यह बताने के लिए काफी है कि अब नशे के सौदागरों के गिन-चुनकर दिन बचे हैं। अब देखना यह है कि भोपाल की जागरूक जनता अपने शहर को इस ज़हर से बचाने के लिए कितनी मुस्तैदी से आगे आती है।




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