तारीख के पन्नों से हकीकत तक: सऊदी अरब का 'हिजरत' प्रोजेक्ट, अब आप भी चल सकेंगे पैगंबर साहब के रास्तों पर
- Apnasamachar bureau

- Feb 17
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मदीना मुनव्वरा | 17 फरवरी 2026
इस्लामी तारीख (इतिहास) में 'हिजरत' यानी पैगंबर मोहम्मद (صلى الله عليه وسلم) का मक्का से मदीना का सफर एक ऐसा मोड़ है, जिसने पूरी दुनिया की तकदीर बदल दी। सालों से हम इस सफर के बारे में किताबों में पढ़ते और बुजुर्गों से सुनते आए हैं। लेकिन अब सऊदी अरब सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे आप इस रूहानी सफर को अपनी आंखों से देख सकेंगे और उन रास्तों पर खुद चल सकेंगे।
सऊदी अरब ने 'हिजरत: इन द प्रॉफेट्स स्टेप्स' (In the Prophet's Steps) नाम से एक बड़े कल्चरल और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का आगाज किया है।
क्या है 'हिजरत' प्रोजेक्ट?

यह प्रोजेक्ट उस 470 किलोमीटर लंबे रास्ते को फिर से जिंदा करने की एक कोशिश है, जिसे पैगंबर साहब और उनके अजीज साथी हजरत अबू बक्र (رضي الله عنه) ने 622 ईस्वी (CE) में तय किया था। मदीना के गवर्नर प्रिंस सलमान बिन सुल्तान ने हाल ही में इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया है।
इस प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:
* ऐतिहासिक रास्तों की बहाली: इस 470 किमी के सफर में आने वाले 41 खास ठिकानों (Landmarks) को फिर से पुराने लुक में संवारा गया है।
* आधुनिक सुविधाएं: यह प्रोजेक्ट इतिहास और आज की टेक्नोलॉजी का एक अनोखा संगम है। इसमें पैदल चलने वालों के लिए रास्ते, गाइडेड टूर्स और डिजिटल नेविगेशन की सुविधा दी गई है।
* पर्यटन की क्षमता: इस रूट पर हर दिन 12,000 मुसाफिर सफर कर सकेंगे, जिन्हें रुकने, खाने और नमाज पढ़ने के लिए हर तरह की सहूलियत मिलेगी।
सफर का अनुभव: 1400 साल पुराना अहसास
सऊदी सरकार का मकसद यह है कि जायरीन (Pilgrims) और सैलानी सिर्फ सफर न करें, बल्कि उस वक्त की मुश्किलों और रूहानियत को महसूस करें।
* 8 बड़े पड़ाव (Stops): पूरे रास्ते में 8 ऐसे केंद्र बनाए गए हैं जहाँ हिजरत की पूरी कहानी डिजिटल मैप्स और ऐतिहासिक सबूतों के साथ बताई जाएगी।
* बाजार और खान-पान: मुसाफिरों की सुविधा के लिए रास्ते में 30 रेस्टोरेंट और 50 से ज्यादा दुकानें तैयार की गई हैं, जहाँ से आप ज़रूरत का सामान और यादगार चीजें ले सकेंगे।
* ग़ार-ए-सौर (Cave of Thawr): इस सफर का सबसे अहम हिस्सा वो गुफा है जहाँ पैगंबर साहब ने पनाह ली थी। अब वहां तक पहुंचना बहुत आसान और सुरक्षित बना दिया गया है।
सऊदी विजन 2030 और इस्लामी विरासत
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के 'विजन 2030' के तहत अपनी इस्लामी और अरब विरासत को दुनिया के सामने लाना एक बड़ा लक्ष्य है। जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन तुर्की अल-शेख के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट किंग सलमान के उन निर्देशों का हिस्सा है जिसमें इस्लामी इतिहास को सहेजने और उसे बढ़ावा देने की बात कही गई है।
यह प्रोजेक्ट न केवल सऊदी अरब में 'हेरिटेज टूरिज्म' के एक नए दौर की शुरुआत करेगा, बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का एक सुनहरा मौका भी होगा।
कब से शुरू होगा यह सफर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट नवंबर 2025 में आधिकारिक तौर पर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद, इतिहास के शौकीन और रूहानी सुकून की तलाश करने वाले लोग पैगंबर साहब के उन्हीं कदमों के निशान पर चल सकेंगे जिन्होंने इस्लाम की बुनियाद को मजबूत किया।
ब्लॉग निष्कर्ष:
'हिजरत' प्रोजेक्ट सिर्फ एक सड़क या रास्ता नहीं है, बल्कि यह हमारे गौरवशाली अतीत का एक जीता-जागता म्यूजियम है। अगर आप भी तारीख (इतिहास) को करीब से देखने का शौक रखते हैं, तो यह सफर आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।
तारीख: 17 फरवरी 2026




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