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ईरान के मिनाब शहर में 165 नन्हीं जानों को अमेरिकी मिसाइलों के बेरहमी से कुचलने को अमेरिकी सैन्य कमांडर ने कहा कि असली आतंकवादी हम ही हैं।

  • Writer:  Bureau ApnaSamachar
    Bureau ApnaSamachar
  • Mar 30
  • 2 min read

ईरान के मिनाब शहर में 165 नन्हीं जानों को अमेरिकी मिसाइलों के बेरहमी से कुचलने की इस दर्दनाक दास्तां ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था।


एक पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने अब अमेरिका के उस डरावने चेहरे को बेनकाब कर दिया है जिसने ईरान में तबाही मचाकर इंसानियत को बुरी तरह शर्मसार किया था।


अमेरिका की टोमाहॉक मिसाइलों के काले धुएं के पीछे ईरान की उन बेगुनाह बच्चियों की चीखें दफन हैं जिन्हें सत्ता के गलियारों में बैठे ताकतवर हुक्मरान अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन की भेंट चढ़ाकर पूरी दुनिया से छिपाना चाहते थे।


लेकिन कैप्टन जोसेफिन गिलबो का यह साहसी खुलासा सत्ता के उन गलियारों में अब हलचल पैदा कर रहा है


ईरान के मिनाब शहर का एक लड़कियों का स्कूल अचानक अमेरिकी टोमाहॉक मिसाइलों का निशाना बन गया इस हमले ने 165 निर्दोष बच्चियों के जीवन की डोर को बेरहमी से काट दिया।


धुएं और मलबे के बीच दफन उन नन्हीं जानों की चीखों ने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया जबकि दुनिया के शक्तिशाली देश इस खूनी खेल पर अपनी चुप्पी साधे बैठे रहे।


जब सिस्टम इस तबाही को दबाने की कोशिश कर रहा था तब अमेरिकी सेना की पूर्व ऑफिसर जोसेफ़िन गिलबो ने चुप्पी तोड़ी है ।


17 साल तक सेना की सेवा करने वाली इस ऑफिसर ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और उन्होंने निडर होकर दुनिया को बताया कि मिनाब में गिरा बारूद किसी और का नहीं बल्कि खुद अमेरिकी डिस्ट्रॉयर से दागी गई मिसाइलें थीं।


कैप्टन गिलबो ने अपने बयान में कड़ा प्रहार करते हुए कहा एक पूर्व अधिकारी के तौर पर मैं कह सकती हूँ कि हम ही असली आतंकवादी हैं।


उन्होंने साफ किया कि ईरान में हुई यह तबाही कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी क्रूरता थी उनके इस खुलासे ने अमेरिका के उस डरावने और दोहरे चेहरे को बेनकाब कर दिया जो अक्सर शांति के नाम पर युद्ध को बढ़ावा देता है।


सच्चाई सामने आने के बाद गिलबो केवल बयानों तक सीमित नहीं रहीं वे गाजा और ईरान में जारी हिंसा के खिलाफ शांति कार्यकर्ता के रूप में सड़क पर उतरीं उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाइयों में बाधा डालकर सीधे हुक्मरानों से जवाबदेही मांगी है।


सत्य की आवाज उठाने के कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया लेकिन उनका हौसला सत्ता की बेड़ियों से कहीं अधिक मजबूत साबित हुआ।


आज मिनाब की उन 165 कलियों की कहानी एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है ।


सैटेलाइट इमेज और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस ने भी गिलबो के दावों की पुष्टि की है अब यह खौफनाक सच दुनिया के सामने है कि कैसे निर्दोषों के लहू से सत्ता के गलियारे रंगे गए।

 
 
 

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